Bharat News Today

वन विभाग और एसटीएफ ने अपने संयुक्त ऑपरेशन में पकड़े सुंदरी प्रजाति के 745 कछुए

इटावा। वन विभाग इटावा और एसटीएफ को टिप ऑफ के जरिए आज बड़ी कामयाबी हासिल हुई जिसमें 745 कछुए 22 बोरों में तस्करों से जीवित बरामद किए गए। इन कछुओं को तस्करी करके दुसरे राज्यों में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
इसी घटना क्रम में मौके पर मौजूद वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि,आज वन विभाग इटावा और STF की संयुक्त कार्यवाही में बरामद हुए कछुओ की प्रजाति का नाम
‘लिसमिस पंक्टाटा’ है जिसे सामान्य तौर पर इंडियन सॉफ्ट शेल टर्टल या कॉमन पौंड टर्टल (सुंदरी) भी कहा जाता है।
इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, जिसका वैज्ञानिक नाम ‘लिसमिस पंक्टाटा’ (Lissemys Punctata) है यह दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली यह मीठे पानी की प्रजाति है। यह भारतीय क्षेत्र में सबसे प्रचुर संख्या में पाया जाने वाले मीठे पानी के कछुओं में से एक है जिसकी सीमा पाकिस्तान से भारत, नेपाल, बांग्लादेश से लेकर पश्चिमी म्यांमार तक है। समाज में ऐसी मान्यता और अंधविश्वास है कि इसका मांस खाने से पौरुष शक्ति बढ़ती है अतः पश्चिम बंगाल के होटलों में इसे बढ़ी हुई कीमत पर स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में परोसा जाता है। आज लगभग 745 कछुए बरामद हुए है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 35 लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है। ज्ञात हो कि,ये कछुए जून के अंत से नवंबर तक नेस्टिंग करते है और सर्दी के मौसम में ठंडे रक्त के जीव होने कारण ये तालाब के बाहर आकर काफी देर तक धूप मैं बैठते है जिससे ये शिकारियों की नजर में आकर आसानी से शिकार हो जाते है।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी इटावा अतुल कांत शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि,उक्त कछुआ तस्कर मैनपुरी के रहने वाले है। और ऐसी जानकारी मिल रही है कि इस तस्करी के कार्य में कुछ सफेद पोश भी इनके साथ शमिल है जिनका भी जल्द ही खुलासा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि, विभागीय कार्यवाही के बाद सभी अभियुक्तों को वन्यजीव अधिनियम 1972 की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि, किसी भी वन्यजीव को खरीदना या बेचना एक अक्षम्य अपराध भी है।

Leave a Reply

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज

Gold & Silver Price