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सर्प कछुए घड़ियाल मगर डॉल्फिन सारस हमारी अमूल्य धरोहर वन्य जीवों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेवारी  सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी (वन्यजीव विशेषज्ञ)विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च,24 विशेष

इटावा। जनपद इटावा में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिये कार्य कर रही संस्था ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर कंजर्वेशन ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचर (ओशन) के महासचिव, सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी ने सभी जनपद वासियों से विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च 2024 के अवसर पर अपील की है कि,जनपद इटावा में कोई भी वन्यजीव कहीं भी दिखाई दे तो कृपया डायल 112 या वन विभाग को सूचित करें यदि कोई भी सम्पर्क सूत्र उपलब्ध न हो तो वे उनके हेल्पलाइन नम्बर 7017204213 पर भी सूचना दे सकते है। नगर पालिका परिषद इटावा के स्वच्छता, पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के ब्रांड एम्बेसडर एवं मिशन स्नेक बाइट डेथ फ्री इण्डिया के यूपी कोर्डिनेटर, वन्यजीव विशेषज्ञ
सर्पमित्र डॉ आशीष ने बताया कि, जनपद इटावा में मौजूद विभिन्न प्रकार के वन्यजीवो को भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के कड़े कानून की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत भारतीय संविधान में विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है। जिसमे चाहे सर्प हों, विस्खापर हों, कछुआ हों सारस हों,घड़ियाल हों ,मगर हों ,डॉल्फिन हो या तेंदुआ हों या अन्य कोई वन्यजीव हों सभी प्रकार के वन्यजीवों को भारत सरकार द्वारा विशेष शेड्यूल के अन्तर्गत विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है। इसी क्रम में संस्था ओशन के महासचिव सर्पमित्र डॉ आशीष जनपद इटावा में प्रकृति में सर्पों की उपयोगिता सहित अन्य वन्यजीवों के प्रकृति में महत्व पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम विद्यालयों /महाविद्यालयों में आयोजित कर महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कर कई सैकड़ा से भी अधिक स्कूली छात्र छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण के लिए जागरूक कर चुके है। डॉ आशीष के अनुसार हाईबरनेशन के लम्बे अंतराल के बाद इस समय सर्पों के निकलने का मौसम भी आ चुका है अतः सावधान हो जाएं आपके स्कूलों में व घरों के आस पास चूहों,कीड़ों,मेंढकों से आकर्षित होकर या उन्हें सूंघकर  सर्प आपके घर में आ सकते है। अतः हमे अपने अपने घर एवं स्कूलों में साफ सफाई के साथ स्वच्छता का भी विशेष ख्याल रखना चाहिये। सर्पदंश का शिकार होने पर हमे बिल्कुल भी घबराना नही चाहिए क्यों कि,सभी सर्प जहरीले भी नही होते है बल्कि सभी सर्प किसान मित्र भी होते है जो चूहों को खाकर पर्यावरण संतुलन के साथ हमारे खाद्यान्न भंडार को चूहों और हानिकारक कीड़ों से सुरक्षित बनाए रखने अपनी अहम भूमिका निभाते है अतः सर्पों और अन्य वन्यजीवों को कभी भी नही मारना चाहिए। डॉ आशीष ने बताया कि, वन्यजीव अधिनियम के नए शंशोधन के अनुसार अब विभिन्न प्रकार के सर्प भी वन्यजीव अधिनियम 1972 की संरक्षित श्रेणी में शामिल किए जा चुके है जिनमे रेड सेंड बोआ,व्हिटेकर बोआ,भारतीय कोबरा,किंगकोबरा,अजगर,चेकर्ड,पिटियास म्यूकोसा,डॉग फेस वाटर स्नेक, इंडियन एग ईटर,ऑलिव कीलबैक,रसल वायपर आदि को शेड्यूल 1 की भाग सी श्रेणी में रखा गया है तो वहीं शेड्यूल दो के भाग सी में ब्लाइंड स्नेक, कोल्युब्रिड स्नेक,शील्डटेल स्नेक, सन बीम स्नेक, थ्रेड स्नेक आदि को शामिल किया गया है। अतः किसी भी शेड्यूल में संरक्षित वन्यजीव को  मारने पर सजा और जुर्माना दोनो का प्रावधान होगा ।

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