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105 सिद्ध सागर महाराज की अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब मोक्ष मार्गी की हुई समाधी

जसवंतनगर/इटावा शुक्रवार आज प्रातः 9 बजे 105 सिद्ध सागर जी महाराज ससंघ आचार्य आदित्य सागर महाराज के शिष्य की समाधी समता पूर्वक जसवंतनगर संत भवन में प्रातः हो गयी है। प्रातः स्वास्थ खराब देखते हुए गुरु आचार्य आदित्य सागर ने अस्पताल की तरफ न जाते हुए बल्कि आजीवन चारो प्रकार के आहार का त्याग कराते हुए समता पूर्वक सिद्ध सागर जी को समाधि पूर्वक सल्लेखना करवाई
आपको बता दे कि मुनि श्री सिद्ध सागर जी का जन्म सन 1962 में  खण्डवा मध्य प्रदेश में हुआ था सिद्ध सागर जी के गृहस्थ जीवन का नाम यतेंद्र कुमार जैन था व उनके  माता-व पिता विमल चंद विजयाबाई जैन निमरानी वाले था सिद्ध सागर जी ने  सन 2015 में ग्रह त्याग कर एव 15/10/2016 को शिखरजी में आचार्य आदर्श सागर जी महाराज से दीक्षा प्राप्त कर कल्याण मार्ग पर चल दिये।
आज जब यह सूचना जसवंतनगर जैन समाज को हुई पूरा समाज संत निवास में पहुँचा और णमोकार मंत्र का पाठ व वैराग्य भावना आदि इस्तुति की, समूचे जैन समाज मे शोक के साथ गुरु के अंतिम यात्रा में जाने की होड़ दिखी सिद्ध सागर जी का डोला जैन मंदिर संत निवास से निकला आगे-आगे आचार्य आदित्य सागर उनके पीछे सिद्ध सागर का डोला रहा युवाओ ने जब तक सूरज चांद रहेगा गुरुवर तेरा नाम रहेगा,सिद्ध सागर गुरुदेब के जयकारों के साथ युवाओ ने डोला को अपने कंधों पर लेते हुए छोटा चौराहा सपा कार्यालय,संस्कार प्ले स्कूल रोड होते प्रमुख मार्गों से विचरण करते हुए समाधी स्थल महावीर वाटिका में पहुँचा,सर्व प्रथम सिद्ध सागर जी की पूजा, शांति धारा, अभिषेक उपरांत समस्त अंतिम किर्याए आचार्य आदित्य सागर महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई प्रत्येक जैन धर्मानुरागी अपने -अपने घरों से नारियल गोला लेकर पहुँचे और मुनि सिद्ध सागर जी को अर्पण किये
अंतिम क्रिया में कुंटलो नारियल गोले ,कई किलो चंदन की लकड़ी,कई किलो घी से अंतिम क्रिया की बेदी बनाते हुए ,उनको समाज के युवा साथियों ने तीन प्रदिक्षिणा लगाते हुए मुखाग्नि दी गयी।
इस अवसर पर जैन समाज जैन बाजार /लुधपुरा समाज ने  एकजुट होकर अपने-अपने प्रतिष्ठान अंत्येष्टि तक बंद कर कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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