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इटावा पहुंची पृथ्वी अधिकार यात्रा लोगों से संवाद स्थापित कर अब शिकोहाबाद के लिये रवाना हुई

इटावा भारतमाता मन्दिर वाराणसी से संसद भवन नई दिल्ली तक 850 किमी की साइकिल यात्रा 4 मार्च 2024 से प्रारंभ होकर 15 मार्च को रात्रि इटावा पहुंची।
सामाजिक कार्यकर्ता इक़रार अहमद के आवास पर साइकिल यात्री डॉ. जावैद अब्दुल्लाह ने बताया कि वैश्विक लोकतंत्र और भूमण्डलीय शान्ति हेतु कार्यरत दरभंगा स्थित संस्था वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (डब्ल्यूएनडी) आने वाले समय में एक ऐतिहासिक मार्च का आयोजन करने जा रही है जो कई दृष्टि से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति को सकारात्मक रूप में प्रभावित करेगी। अप्रैल 2020 में लॉकडाउन से ही (पृथ्वी बचाओ आन्दोलन के तहत) पृथ्वी ग्रह को सभी राष्ट्रों की संविधान-प्रस्तावना में शामिल करने के प्रस्ताव पर प्रतिबद्ध डब्ल्यूएनडी धीरे-धीरे अप्रैल 2026 में प्रस्तावित प्लानेट मार्च (जिसे पहले ‘धरती जोड़ो यात्रा’ नाम दिया गया था) की तैयारी शुरू कर रही है।

इसी क्रम में, विभिन्न देशों के दूतावास और भारत सरकार से सहयोग प्राप्त करने के इरादे से डब्ल्यूएनडी अध्यक्ष डॉ. जावैद अब्दुल्लाह यूनाइटेड नेशन्स इण्डिया ऑफ़िस, पार्लियामेंट, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय में इसका आवेदन देंगे। इस एकल साइकिल मार्च की संज्ञा ‘पृथ्वी अधिकार यात्रा-प्रकृति अधिकार यात्रा’ है जो रमज़ान के रोज़ा (उपवास) के साथ भी चलेगी। बताते चलें कि नेचुरल डेमोक्रेसी के अंतर्गत प्रमुख रूप से दो भागों में कुल आठ प्रस्ताव हैं। जिनमें प्रथम भाग के चार प्रस्ताव इस प्रकार हैं: (1) पृथ्वी ग्रह को संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया जाये। (2) प्रकृति-पर्यावरण (वन, वायु, “मिटटी, जल) के संरक्षण-संकल्प को प्रस्तावना में जोड़ा जाये (3) पृथ्वी ग्रह को राष्ट्रध्वज में में स्थान दिया जाये (4) प्रकृति-पर्यावरणीय नागरिकता के कर्तव्य बोध यानी पृथ्वी-प्रकृति पर हमारी निर्भरता की वास्तविकता को ध्यान में रखते हुये पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी ग्रह का संवैधानिक ध्वजारोहण किया जाये। ज्ञात हो कि भारत में इससे पहले 1998-99 में नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता और बचपन बचाओ आन्दोलन के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी जी ने बाल मज़दूरी के विरुद्ध वैश्विक मार्च (ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर) आयोजित किया था। 103 देश, 80 हज़ार किमी के उस मार्च में डेढ़ करोड़ लोग और दुनिया भर से 71 राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुये थे। लेखक-दार्शनिक और पृथ्वी अधिकार कार्यकर्ता डॉ. जावैद अब्दुल्लाह का मानना है कि 2040 तक विश्व की राजनीति बदलेगी; लेकिन यह बदलाव इस ग्रह पर जीवन-हित में होना चाहिये जिसमें एशिया सहित भारत की भूमिका अग्रणी हो, ऐसा हम सबको प्रयास करना चाहिये। इस अवसर पर अब्दुल कलाम वेलफ़ेयर सोसायटी के पदाधिकारियों इक़रार अहमद, अब्दुल मन्नान राईन, माहिर अंसारी, मोहम्मद साजिद, आमिर खान, अनीस आदि लोगों ने स्वागत किया।

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