Bharat News Today

बाहरियों को साधने में अपने हुए बेगाने,दूसरे दलों को तरजीह से अपनों में नाराजगी

अमेठी।बाहरियों को साधने में अपने भी बेगाने हो गए।अमेठी विधायक महराजी प्रजापति और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह को साधने से अपनों में नाराजगी बढ़ गई।अमेठी में पांच साल तक सक्रिय रहने के बाद भी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव हार गईं।गांधी परिवार के सेवक किशोरी लाल शर्मा ने स्मृति ईरानी को हरा दिया। गांधी परिवार का खुद अमेठी से आने की बजाय किशोरीलाल शर्मा को उतारने का दांव भी कामयाब रहा।

कहा जा रहा है कि जिस तरह स्मृति ईरानी 2014 में हार के बाद अपनी मेहनत से 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के श्रेय की हकदार थीं, उसी तरह इस हार के लिए भी खुद ही जिम्मेदार हैं।लोग बताते हैं कि स्मृति 2019 का चुनाव जीतने के बाद से ही अपनी जीत का आधार बने काडर की जगह दूसरे दलों के लोगों को तवज्जो देने लगीं।

सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति जेल में हैं। भाजपा उन पर लगे आरोपों को मुद्दा बनाती रही है। इसके बावजूद स्मृति ने गायत्री प्रजापति की पत्नी अमेठी से विधायक महराजी प्रजापति और उनके परिवार का मदद लेने का प्रयास किया। इससे पार्टी का काडर खुश नहीं था।

महराजी प्रजापति से हारने वाले पूर्व सांसद संजय सिंह तक घर बैठ गए।इसी तरह गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह भाजपा के चंद्र प्रकाश मिश्रा को हराकर चुनाव जीते थे। नगर पालिका चुनाव में गौरीगंज नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष रश्मि सिंह के पति दीपक सिंह और राकेश सिंह के बीच मारपीट और एफआईआर तक हुई थी,लेकिन स्मृति ने राकेश को भाजपा में शामिल करवा दिया। पार्टी के नेता और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता स्मृति का विरोध तो नहीं कर सके और चुनाव में साथ भी चले, लेकिन इसका उनकी नाराजगी का खामियाजा स्मृति को चुकाना पड़ा।

स्मृति ईरानी की हार में उनके कुछ नजदीकी लोग भी कारण बने। बताया जाता है कि 2014 में हारने के बाद 2019 तक स्मृति के क्षेत्र में आने पर कोई भी आसानी से मिल सकता था,लेकिन 2019 में जीत के बाद स्मृति के आसपास ऐसे लोगों का घेरा हो गया जो आम लोगों और उनके बीच में बाधा बनकर खड़े हो गए।

चुनाव के दौरान आम लोग ऐसे लोगों का नाम गिनाते नजर आए। स्मृति ईरानी लोगों की नाराजगी भांप नहीं पाईं। नतीजा यह हुआ कि न सिर्फ जीत का अंतर घटा, बल्कि वोट शेयर भी कम हो गया।स्मृति अमेठी लोकसभा क्षेत्र की सभी पांच विधानसभा सीटों पर हार गईं। इनमें तीन में तो भाजपा के ही विधायक हैं। एक विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह तो मंत्री भी हैं।

चुनावी नतीजे आने के बाद स्मृति ईरानी ने भाजपा कार्यालय पर प्रेसवार्ता कर जनता का आभार जताया।स्मृति ने कहा कि जैसे अब तक जनता की सेवा की, आगे भी करती रहू़ंगी। स्मृति ने कांग्रेस प्रत्याशी केएल शर्मा की जीत पर बधाई दी।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए स्मृति ने कहा कि क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वो भी सही, वरदान…

Leave a Reply

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज

Gold & Silver Price